कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संगठन तिरंगे और भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करता। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद आरएसएस ने अपने मुख्यालय पर 52 वर्षों तक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा नहीं फहराया।
प्रियंक खड़गे ने कहा कि यह इतिहास का दर्ज तथ्य है कि आरएसएस ने लंबे समय तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया। उनके अनुसार, जो संगठन राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के प्रति सम्मान नहीं दिखाता, वह देशभक्ति पर दूसरों को उपदेश नहीं दे सकता।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है और सभी नागरिकों एवं संगठनों को उसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा संविधान की मूल भावना से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों और संगठनों की जिम्मेदारी है।
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प्रियंक खड़गे के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से जुड़े नेताओं की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले भी कांग्रेस और भाजपा के बीच आरएसएस की भूमिका, राष्ट्रवाद और संविधान जैसे मुद्दों पर कई बार तीखी राजनीतिक बयानबाजी होती रही है।
हाल के वर्षों में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न संगठनों की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इसी क्रम में प्रियंक खड़गे का यह बयान भी सामने आया है, जिसने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।
गौरतलब है कि आरएसएस और कांग्रेस के बीच वैचारिक मतभेद लंबे समय से रहे हैं। दोनों पक्ष समय-समय पर एक-दूसरे की विचारधारा और इतिहास को लेकर सार्वजनिक रूप से आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में प्रियंक खड़गे का यह बयान भी राजनीतिक विवाद का नया कारण बन सकता है।
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