बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी ने कहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की राजनीति तब तक सार्थक नहीं हो सकती, जब तक उसमें पासमांदा मुसलमानों को वास्तविक रूप से शामिल नहीं किया जाता। ऑल इंडिया पासमांदा मुस्लिम महाज़ (AIPMM) के अध्यक्ष रहे अंसारी ने जोर देकर कहा कि देश की धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को पिछड़े मुसलमानों के मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए, न कि केवल चुनावों में उनके वोट को सुनिश्चित मानकर आगे बढ़ना चाहिए।
अली अनवर अंसारी हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ केवल नारे या भाषण नहीं होता, बल्कि समाज के सबसे हाशिये पर खड़े वर्गों की वास्तविक भागीदारी और उत्थान से जुड़ा होता है। पासमांदा मुसलमान लंबे समय से शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पिछड़े रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज किया गया है।
अंसारी ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष दल सच में सामाजिक न्याय की राजनीति करना चाहते हैं, तो उन्हें मुस्लिम समाज के भीतर मौजूद जातिगत और सामाजिक असमानताओं को स्वीकार करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक कई दलों ने मुस्लिम समाज को एक समान इकाई मानकर नीतियां बनाई हैं, जिससे पिछड़े तबकों की आवाज दब गई।
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उनका कहना है कि पासमांदा मुसलमानों को केवल चुनावी समर्थन का साधन न समझकर नीति निर्माण और नेतृत्व में हिस्सेदारी दी जानी चाहिए। अंसारी के इस बयान को बिहार की राजनीति में कांग्रेस की रणनीति और मुस्लिम वोट बैंक की नई व्याख्या के रूप में देखा जा रहा है।
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