रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि जनवरी 2026 में उसकी जामनगर रिफाइनरी को रूस से कच्चे तेल की कोई आपूर्ति मिलने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने यह भी बताया कि पिछले तीन हफ्तों के दौरान भी रिफाइनरी को रूस से कोई तेल प्राप्त नहीं हुआ है। जामनगर स्थित यह रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी मानी जाती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कंपनी का यह बयान 20 नवंबर 2025 को की गई उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा था कि उसने जामनगर में स्थित अपनी निर्यात-उन्मुख विशेष आर्थिक क्षेत्र (स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन – SEZ) इकाई के लिए रूसी तेल का आयात रोक दिया है। यह निर्णय वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों, आपूर्ति शृंखला में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच लिया गया था।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुसार, हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की खरीद रणनीति में विविधता लाई गई है और कंपनी अन्य देशों से आपूर्ति के विकल्पों पर निर्भर है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनिंग कंपनी अपने कच्चे तेल के स्रोतों को संतुलित करने और संभावित जोखिमों को कम करने की दिशा में कदम उठा रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी तेल की आपूर्ति रुकने का असर न केवल रिलायंस की खरीद रणनीति पर पड़ सकता है, बल्कि यह वैश्विक तेल व्यापार और कीमतों पर भी प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि रिफाइनरी के संचालन पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वैकल्पिक स्रोतों से पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
रिलायंस का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार प्रतिबंधों और कच्चे तेल के दामों को लेकर लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
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