तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की भगवान शिव और भगवान राम को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान रेड्डी ने कहा कि “शिव गरीबों के देवता हैं, जबकि राम अमीरों के देवता हैं।” उनके इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
रेवंत रेड्डी ने उत्तर और दक्षिण भारत की राजनीतिक तथा धार्मिक पहचान की तुलना करते हुए कहा कि दक्षिण भारत में लोग शिव के भक्त हैं, जबकि उत्तर भारत में भगवान राम की पूजा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने उत्तर भारत में भगवान राम को अपने राजनीतिक प्रतीक के रूप में ‘चुरा लिया’ है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बीजेपी नेता मंचों से ‘हर हर महादेव’ का नारा क्यों नहीं लगाते और केवल ‘जय श्री राम’ क्यों कहते हैं।
रेड्डी ने कांग्रेस के दक्षिण भारत में मजबूत होने और उत्तर, पूर्व तथा पश्चिम भारत में अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने भगवान राम से जुड़ी भावनाओं को अपने राजनीतिक विस्तार के लिए इस्तेमाल किया है। ये टिप्पणियां 28 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई थीं।
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बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने रेड्डी की टिप्पणी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को भगवान राम और भगवान शिव को उत्तर-दक्षिण या अमीर-गरीब के आधार पर नहीं बांटना चाहिए। उन्होंने तेलंगाना के वेमुलवाड़ा स्थित राजराजेश्वर स्वामी मंदिर को ‘दक्षिण काशी’ और भद्राचलम को ‘दक्षिण अयोध्या’ बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।
बंदी संजय कुमार ने कहा कि भगवान शिव और भगवान विष्णु को अलग-अलग खेमों में बांटना सनातन धर्म की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी विश्वनाथ और वेमुलवाड़ा मंदिर से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।
रेवंत रेड्डी ने इसी कार्यक्रम में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी केंद्र और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने ‘साइमन गो बैक’ आंदोलन की तर्ज पर ‘एसआईआर गो बैक’ अभियान की बात कही और विपक्षी नेताओं से एकजुट होने का आह्वान किया।
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