बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) के ग्लोबल चेयरमैन रिच लेसर ने कहा है कि भारत के लिए ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नवाचार करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस दिशा में चीन पहले ही बढ़त बना चुका है। आइडिया एक्सचेंज कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूमिका, भारत-अमेरिका संबंधों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चीन की क्षमताओं और मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम के निर्माण जैसे अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे।
रिच लेसर ने कहा कि दुनिया इस समय असाधारण बदलाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों और टैरिफ का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप अनिश्चितता की ताकत में गहरा विश्वास रखते हैं। हालांकि, इसके बावजूद वह भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर आशावादी हैं।
लेसर के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप खुद को एक सख्त सौदेबाज मानते हैं और सच्चाई यह भी है कि भारत भी दशकों से व्यापार के मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाता रहा है। यह केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के पास कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर काम करने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका, दोनों के लिए यह जरूरी है कि वे एक प्रभावी और व्यावहारिक कार्य मॉडल विकसित करें। भले ही यह पूर्ण गठबंधन न हो, लेकिन रणनीतिक रूप से यह दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है। भारत अपनी स्वतंत्रता को बहुत महत्व देता है और यही उसकी विदेश नीति की बुनियाद भी है।
लेसर ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही भविष्य में कोई व्यापार समझौता हो जाए और वह अच्छा भी हो, फिर भी यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि सब कुछ पूरी तरह सहज हो जाएगा। लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि दोनों देशों के बीच सहयोग उत्पादक नहीं हो सकता।
ग्रीन इकोनॉमी और तकनीकी नवाचार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यदि भारत इस क्षेत्र में नेतृत्व करना चाहता है, तो उसे तेजी से नवाचार और मजबूत औद्योगिक ढांचा तैयार करना होगा।
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