नागपुर नगर निगम (एनएमसी) के चुनावों के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार सुबह अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के बाद उन्होंने ‘नोटा’ (None of the Above) विकल्प को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि नोटा का चयन अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे उम्मीदवार को फायदा पहुंचाता है, जिसे मतदाता नहीं चाहते।
मोहन भागवत नागपुर के उन शुरुआती मतदाताओं में शामिल रहे, जिन्होंने सुबह-सुबह मतदान किया। वह महाराष्ट्र के नागपुर शहर के ऐतिहासिक महाल क्षेत्र स्थित एक मतदान केंद्र पर लगभग सुबह 7:30 बजे पहुंचे और शांतिपूर्वक मतदान प्रक्रिया पूरी की। मतदान के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे और आम मतदाताओं में भी उत्साह देखा गया।
मतदान के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में भागवत ने लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह आवश्यक है कि नागरिक सोच-समझकर अपने मताधिकार का उपयोग करें। नोटा विकल्प पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने यह संकेत दिया कि यदि मतदाता किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देता, तो इसका लाभ उस उम्मीदवार को मिल सकता है जिसे कम वोट मिले हों, जिससे अवांछित परिणाम सामने आ सकते हैं।
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नागपुर नगर निगम चुनावों को राज्य की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इन चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला है और मतदाताओं की भागीदारी को लोकतंत्र की सेहत के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन की ओर से निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के दावे किए गए हैं।
मोहन भागवत की उपस्थिति और उनकी टिप्पणी ने चुनावी माहौल में चर्चा को और तेज कर दिया है, खासकर नोटा की भूमिका और उसके प्रभाव को लेकर।
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