केरल
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर, जो भगवान अयप्पा को समर्पित है, में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संवैधानिक पीठ 7 अप्रैल 2026 से पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी दशकों पुरानी रोक हटा दी थी। इसके बाद 10 फरवरी 2020 को अदालत ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने का निर्णय बरकरार रखा था। अब सभी पक्षों को 14 मार्च तक अपने लिखित पक्ष दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत के अनुसार, 7 से 9 अप्रैल तक पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, जबकि 14 से 16 अप्रैल तक विरोधी पक्ष अपनी बात रखेगा। 21 अप्रैल को प्रत्युत्तर दलीलें और 22 अप्रैल तक एमिकस क्यूरी की अंतिम प्रस्तुतियां पूरी होने की संभावना है।
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केंद्र सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह पुनर्विचार याचिका का समर्थन करती है, हालांकि सुनवाई के दौरान कुछ “अप्रत्याशित चुनौतियों” का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने वामपंथी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि सरकार को अपने हलफनामे पर स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
यह मामला धार्मिक परंपरा, लैंगिक समानता और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा हुआ है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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