महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव 7 फरवरी (शनिवार) को कराने का कार्यक्रम तय किया है। इससे 2017 के बाद लंबे समय से रुके ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनाव फिर से शुरू हो रहे हैं। इसी क्रम में सतारा जिला भी चुनावी तैयारियों में जुट गया है। 2021 की जनगणना के अनुसार सतारा की आबादी लगभग 25.18 लाख है, जिसमें अनुसूचित जाति की आबादी 2.59 लाख और अनुसूचित जनजाति की आबादी 23,556 है।
सतारा जिला परिषद के चुनाव 2017 में हुए थे, जिनमें कुल 64 सीटें थीं, जिनमें से 32 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। उस समय जिले में 19.66 लाख मतदाता थे, जिनमें 10.14 लाख पुरुष, 9.52 लाख महिलाएं और 5 अन्य मतदाता शामिल थे। चुनाव में कुल 13.55 लाख मतदाताओं ने मतदान किया, जिससे 68.90 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।
2017 के चुनाव परिणामों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 64 में से 39 सीटें जीत लीं और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। भाजपा और कांग्रेस को 7-7 सीटें मिलीं, जबकि अन्य दलों को भी 7 सीटें हासिल हुईं। शिवसेना को 2 सीटें और निर्दलीय उम्मीदवारों को 2 सीटें मिलीं। वहीं बसपा, सीपीआई, सीपीआई(एम) और मनसे को कोई सफलता नहीं मिली।
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सतारा जिले की 11 पंचायत समितियों—खंडाला, फलटन, मान, खटाव, कोरेगांव, वाई, महाबलेश्वर, जावली, सतारा, पाटन और कराड—में 2017 में कुल 128 सीटों पर चुनाव हुए थे। इन चुनावों में भी एनसीपी ने 76 सीटें जीतकर बड़ी जीत दर्ज की। कांग्रेस को 16 सीटें, भाजपा को 12, शिवसेना को 6 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं।
2026 के आगामी चुनावों में सीटों की संख्या बढ़ाकर 65 जिला परिषद और 130 पंचायत समिति सीटें कर दी गई हैं। पिछले प्रदर्शन के कारण एनसीपी का दबदबा बरकरार है, जबकि अन्य दल इस बार मजबूत चुनौती देने की तैयारी में हैं।
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