पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के तीन महीने बाद भी मतदाता केंद्रों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। लाखों मतदाता अब भी चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा बताए गए “तर्कसंगत विसंगतियों” (logical discrepancies) का जवाब देने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।
निर्धारित समय सीमा के अनुसार, प्रारूपिक मतदाता सूची (draft electoral roll) 14 फरवरी को प्रकाशित की जानी है। इसी के मद्देनज़र सुनवाइयाँ 7 फरवरी तक पूरी करनी हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस समयसीमा ने सुनवाई केंद्रों पर दबाव बढ़ा दिया है, जहाँ हर दिन सैकड़ों मतदाताओं को बुलाया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान मतदाता और चुनाव अधिकारी दोनों समय की दौड़ में हैं। कई मतदाता अपने नाम में वंश या उपनाम के भिन्न रूप, प्रशासनिक त्रुटियों और प्रणाली द्वारा भेजे गए स्वचालित नोटिस को लेकर भ्रमित हैं। इस कारण सुनवाई प्रक्रिया में विलंब और जटिलताएँ उत्पन्न हो रही हैं।
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चुनाव आयोग ने पहले ही चेतावनी दी है कि सभी मतदाता सूची की त्रुटियों को समय पर ठीक कर लें, ताकि अंतिम मतदाता सूची (final voter list) समय पर प्रकाशित की जा सके। अधिकारी यह भी कहते हैं कि सुनवाई प्रक्रिया में सहयोग न करने वाले मतदाता अपनी मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
राज्य के चुनाव अधिकारियों ने कहा कि वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि मतदाता अपने मुद्दों को जल्दी से जल्दी हल कर सकें। वहीं मतदाता भी लंबे समय तक कतार में खड़े होकर अपनी समस्याओं का समाधान पाने का इंतजार कर रहे हैं।
यह स्थिति दिखाती है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया में अभी भी चुनौतियाँ बरकरार हैं और समय की सख्ती और प्रशासनिक जटिलताएँ दोनों ही मतदाताओं और अधिकारियों पर दबाव डाल रही हैं।
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