घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। निजी बैंक शेयरों में कमजोरी, कंपनियों के निराशाजनक तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 257.20 अंक या 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 पर बंद हुआ, जबकि बीएसई सेंसेक्स 876.37 अंक या 1.17 प्रतिशत लुढ़ककर 73,852.90 के स्तर पर आ गया।
बिकवाली का दबाव लगभग सभी क्षेत्रों में देखा गया और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के अधिकांश सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक अकेला प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक रहा जो 2.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ सकारात्मक दायरे में बंद हुआ। वहीं निफ्टी आईटी सूचकांक 1.56 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी सूचकांक 1.40 प्रतिशत गिरा। निफ्टी ऑटो सूचकांक में 0.80 प्रतिशत, निफ्टी मेटल सूचकांक में 0.78 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा सूचकांक में 0.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों में एक्सिस बैंक सबसे बड़े घाटे में रहा, जिसमें 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। टीएमपीवी, इंफोसिस और अल्ट्राटेक सीमेंट भी प्रमुख रूप से पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर, एसबीआई, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स और अडानी पोर्ट्स शीर्ष बढ़त वाले शेयरों में रहे।
और पढ़ें: पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21-23 अक्टूबर तक भारत दौरे पर, पीएम मोदी से होगी द्विपक्षीय वार्ता
पीएल कैपिटल के चीफ बिजनेस ऑफिसर (एडवाइजरी एंड डीलिंग) विक्रम कासट ने कहा कि निजी बैंकों में कमजोरी, उम्मीदों से कम रहे तिमाही नतीजों और वैश्विक स्तर पर सतर्क धारणा ने मुनाफावसूली को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा, "निजी बैंकिंग क्षेत्र की कमजोरी, उम्मीदों के मुकाबले निराशाजनक नतीजों और वैश्विक स्तर पर सतर्क धारणा ने मुनाफावसूली को तेज किया, जबकि पीएसयू बैंकों ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई।" कासट के अनुसार, आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशक कंपनियों के तिमाही नतीजों, तेल की कीमतों तथा मुद्रा की स्थिरता पर नजर रखेंगे। रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड 108.50 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जिससे आयातित महंगाई और कॉरपोरेट लागत को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च प्रमुख राजीव शरण ने कहा कि रुपया सोमवार को लगातार सातवें सत्र में मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में 94.8 के स्तर को छूते हुए डॉलर के मुकाबले 94.95 के आसपास बना रहा, जो इस महीने की शुरुआत में करीब 97 के स्तर से तेज सुधार को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को जारी भारतीय रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 8.6 अरब डॉलर घटकर 726 अरब डॉलर रह गया, जिससे सितंबर की शुरुआत से अब तक कुल गिरावट लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। शरण के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को 1,166 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर की ओर बढ़ने से रिज़र्व बैंक हमेशा स्थिरता नहीं बनाए रख सकता और अब बाजार के मूलभूत कारकों को आगे आना होगा।
जिंस बाजार में सोने की कीमत 24 कैरेट के लिए 1,48,085 रुपये प्रति 10 ग्राम पर लगभग स्थिर रही, जबकि चांदी की कीमत बढ़कर 2,11,351 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखा गया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.64 प्रतिशत गिरकर 64,910 पर बंद हुआ, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.07 प्रतिशत गिरकर 5,412 पर और ताइवान का वेटेड इंडेक्स 0.62 प्रतिशत फिसलकर 46,822 पर रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.73 प्रतिशत चढ़कर 5,768 पर पहुंचा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,186 पर बंद हुआ।
और पढ़ें: दुष्यंत कुमार गौतम ने ली सिक्किम के राज्यपाल पद की शपथ, विवाद के बीच हुआ शपथ ग्रहण