गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। उनके बयान ऐसे समय आए हैं, जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
वाघेला ने कहा कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार समेत चुनाव आयोग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। वाघेला के बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के दिल्ली प्रदर्शन को चुनावी हार की निराशा निकालने का प्रयास बताया। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर भ्रम फैलाने और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट में इस बात से जुड़े मामले पर सुनवाई हो रही है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के सामूहिक अधिकारों का अकेले इस्तेमाल किया।
और पढ़ें: हम उन्हें खत्म कर देंगे, कोई नहीं बचेगा, राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार और बीजेपी पर हमला
वाघेला ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में काम करना चाहिए, लेकिन मौजूदा व्यवस्था पर उन्होंने वैचारिक पक्षधरता के आरोप लगाए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कथित संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को किसी राजनीतिक या वैचारिक निर्देश के बजाय संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
दिल्ली में विपक्षी सांसदों, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं, ने चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च कर सीईसी के इस्तीफे की मांग की। एसआईआर को लेकर विपक्ष चुनावी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगा रहा है, जबकि बीजेपी और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
वाघेला ने संस्थागत सुधारों की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और अधिकारियों के लिए कुछ वर्षों तक नए पद स्वीकार करने पर रोक होनी चाहिए, ताकि संस्थागत निष्पक्षता मजबूत की जा सके।
कांग्रेस में वापसी की अटकलों पर उन्होंने कहा कि बीजेपी को हराने के लिए वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने किसी पद या व्यक्तिगत लाभ की मांग से इनकार किया।
और पढ़ें: गंभीर आरोप, लेकिन आदतन अपराधी नहीं, दिल्ली कोर्ट ने 17 प्रदर्शनकारी छात्रों को दी जमानत