सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन के 23वें दिन सोमवार को ऐलान किया कि जब तक युवा प्रतिनिधियों और सांसदों के बीच सार्थक संवाद नहीं होता, तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि या तो युवाओं के प्रतिनिधिमंडल को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति दी जाए या फिर सांसद सफदरजंग अस्पताल आकर उनसे मुलाकात करें।
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के युवाओं की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने के लिए है। उनका कहना है कि युवाओं की आवाज़ को संसद तक पहुंचाना लोकतंत्र की मूल भावना का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, "मैंने निर्णय लिया है कि जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती या सांसद सफदरजंग अस्पताल आकर मुझसे नहीं मिलते, तब तक मैं अपना अनशन जारी रखूंगा।"
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वांगचुक ने यह भी कहा कि देश के लाखों छात्र और युवा परीक्षा प्रणाली, शिक्षा सुधार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि इन विषयों पर सरकार और जनप्रतिनिधियों को सीधे युवाओं से बातचीत करनी चाहिए, ताकि समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
सामाजिक कार्यकर्ता फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। लंबे समय से चल रहे अनशन के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर रखे हुए हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका संकल्प अडिग है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाते रहेंगे।
वांगचुक ने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा या टकराव आंदोलन के उद्देश्य को कमजोर करता है।
उधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ऐसे में सोनम वांगचुक का यह बयान आंदोलन को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। फिलहाल उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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