सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में इंडियन मुजाहिदीन के दोषी अहमद बाव़ा उर्फ अबू अबुबकर बरलवी की मौत की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड भी तलब किए हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति एजी मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अहमद बाव़ा की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसकी मौत की सजा बरकरार रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फिलहाल उसकी फांसी पर अमल नहीं किया जा सकेगा।
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में करीब 70 मिनट के भीतर अलग-अलग स्थानों पर सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इस हमले में 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। घायलों को इलाज के लिए ले जाए जा रहे अस्पतालों में भी धमाके हुए थे।
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फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने मामले में 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई थी। जुलाई 2026 में गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 की उम्रकैद को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने मामले में बड़ी संख्या में हुई मौतों, साजिश के व्यापक स्वरूप और आतंक फैलाने के उद्देश्य को सजा की पुष्टि के प्रमुख आधारों में गिना था।
इस मामले में सफदर नागोरी समेत कई आरोपी शामिल हैं। अभियोजन के अनुसार, कुछ दोषियों की भूमिका आतंकी प्रशिक्षण शिविरों, विस्फोटों के लिए इस्तेमाल सामग्री जुटाने और अन्य आरोपियों को ठिकाना उपलब्ध कराने से जुड़ी थी।
सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश अहमद बाव़ा की याचिका से संबंधित है। अदालत ने इस स्तर पर दोषसिद्धि या सजा के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
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