बिहार की राजनीति में मंगलवार (14 जनवरी 2026) को उस समय हलचल मच गई, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद के अलग-थलग पड़े बड़े बेटे तेज प्रताप यादव, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा आयोजित एक भोज में शामिल हुए। तेज प्रताप यादव की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया।
तेज प्रताप यादव, जो पूर्व मंत्री रह चुके हैं, को हाल ही में विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। भोज के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने तेज प्रताप यादव का गर्मजोशी से स्वागत किया।
बताया गया कि कुछ दिन पहले तेज प्रताप यादव ने स्वयं उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कर मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को होने वाले अपने भोज का निमंत्रण लिया था। इसी कड़ी में विजय कुमार सिन्हा ने पर्व की पूर्व संध्या पर यह भोज आयोजित किया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जद(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और मंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख संतोष कुमार सुमन सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
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जब पत्रकारों ने तेज प्रताप यादव से एनडीए में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा, “हमारी राजनीतिक विचारधाराएं भले अलग हों, लेकिन हमारी सांस्कृतिक सोच एक जैसी है। बाकी बातों के बारे में समय आने पर आपको पता चल जाएगा।”
वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी इसी तरह का जवाब देते हुए कहा कि “सभी बिहारी एकजुट हैं और सनातन संस्कृति से सकारात्मक ऊर्जा लेते हैं, जिसका प्रतीक मकर संक्रांति है।”
तेज प्रताप यादव के भाजपा नीत गठबंधन में शामिल होने को लेकर पूछे गए अन्य सवालों पर भी सिन्हा ने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि समय आने पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
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