एलुरु ज़िले के गांवों में पिछले आठ दिनों से फैली चिंता आखिरकार समाप्त हो गई है। वन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मानव बस्तियों के आसपास घूम रहा बाघ सुरक्षित रूप से पापिकोंडालु राष्ट्रीय उद्यान (पीएनपी) के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में वापस लौट गया है। इस खबर के बाद स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है।
पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से यह बाघ गांवों के नज़दीक देखे जाने के कारण लोगों में दहशत का कारण बना हुआ था। एहतियात के तौर पर वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी थी और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई थी। वनकर्मियों की टीम लगातार बाघ की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए थी, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बाघ के अंतिम पगचिह्न (पगमार्क्स) ऐसे स्थान पर मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह अपने प्राकृतिक आवास के भीतर गहराई में चला गया है। अधिकारियों ने बताया कि बाघ लंकालापल्ली से होते हुए बुट्टायगुडेम मंडल के रामनारासपुरम के रास्ते ईको-सेंसिटिव ज़ोन में प्रवेश कर गया।
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वन अधिकारियों ने कहा कि बाघ की सुरक्षित वापसी से यह साबित होता है कि सतर्क निगरानी और समय पर किए गए उपाय कारगर रहे। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल से सटे इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
इस घटना ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे को एक बार फिर उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आवासों के सिकुड़ने के कारण वन्यजीव कभी-कभी आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं। ऐसे में ईको-सेंसिटिव ज़ोन और राष्ट्रीय उद्यानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि पापिकोंडालु राष्ट्रीय उद्यान के आसपास लगातार निगरानी जारी रहेगी, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके और मानव तथा वन्यजीवों के बीच संतुलन बना रहे।
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