पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक संकट तब और गहरा गया जब कई टीएमसी सांसदों की दिल्ली में हुई बैठकों ने पार्टी में विभाजन की अटकलों को तेज कर दिया।
आज राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ दी। अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी के भीतर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव में जनता का झुकाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर है।
इसके तुरंत बाद दिल्ली में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां टीएमसी के 11 अन्य सांसदों ने रॉय के आवास पर मुलाकात की। इसके बाद इन सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की, जिससे उनके बीजेपी में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
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सूत्रों के अनुसार, यह बैठकें केवल साधारण मुलाकातें नहीं थीं, बल्कि इनमें भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। टीएमसी के कुल 28 लोकसभा और 13 राज्यसभा सांसद हैं, जिनमें से कई नेताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी सामने आया है कि बागी नेताओं ने ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुलकर असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि पार्टी के गिरते प्रदर्शन के लिए अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली जिम्मेदार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह बगावत जारी रहती है तो आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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