अमेरिका में 11 सितंबर के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। व्हाइट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में ट्रंप ने अमेरिकी सुरक्षा बलों और आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों को भी सम्मानित किया।
80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने कहा कि अमेरिका अपने सुरक्षाकर्मियों और सैन्य सेवा में लगे लोगों को सलाम करता है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
ट्रंप प्रशासन 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद सत्ता में लौटने के बाद से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का लगातार विरोध कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि तेहरान को अपना परमाणु कार्यक्रम समाप्त करना चाहिए। वॉशिंगटन ने कई बार ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है।
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हालांकि, ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों से इनकार करता है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के उस प्रस्ताव की भी आलोचना की है, जिसमें परमाणु अनुपालन को लेकर मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा गया।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में ईरान के प्रतिनिधि रेजा नजाफी ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिका और उसके सहयोगियों के राजनीतिक दबाव में पारित किया गया।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर कहा कि अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान पर दबाव गंभीर और खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों की भी आलोचना की।
ईरान द्वारा रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किए जाने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। पेजेश्कियन ने कहा कि किसी देश के व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और वित्तीय व्यवस्था पर दबाव का असर उसकी सीमाओं से बाहर भी पड़ता है।
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