उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य तेजी से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों और चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का स्पष्ट संकेत है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्र के रूप में रही है। यहां स्थित केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ तीर्थ स्थलों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क, स्वास्थ्य, आवास और डिजिटल सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ रही है। चारधाम यात्रा के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, जागेश्वर, हेमकुंड साहिब और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
धामी ने कहा कि आध्यात्मिक पर्यटन केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को लाभ मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को भी संरक्षित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना की पुरानी परंपरा रही है। ऋषिकेश को पहले से ही योग की वैश्विक राजधानी के रूप में पहचान मिली हुई है और अब पूरे राज्य को आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तराखंड दुनिया भर के लोगों के लिए शांति, आध्यात्म और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनेगा।
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