केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में ‘वंदे मातरम् विधेयक’ पेश करने की तैयारी में है। इस विधेयक के जरिए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को वही कानूनी सुरक्षा देने का प्रस्ताव है, जो वर्तमान में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में यह विधेयक पेश कर सकते हैं।
यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो वंदे मातरम् का जानबूझकर अपमान करना या इसके गायन में बाधा डालना कानूनन अपराध माना जाएगा। इसके लिए सजा का प्रावधान भी किया गया है।
विधेयक में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
प्रस्तावित कानून के तहत ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान वैधानिक संरक्षण मिलेगा। किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या इसके गायन को रोकने पर आपराधिक कार्रवाई की जा सकेगी।
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अपमान करने पर क्या होगी सजा?
विधेयक के अनुसार, वंदे मातरम् का जानबूझकर अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने वाले व्यक्ति को:
- अधिकतम तीन साल तक की जेल
- जुर्माना
- या जेल और जुर्माना दोनों की सजा हो सकती है।
सरकार यह विधेयक वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित वर्षभर के कार्यक्रमों के बीच ला रही है।
वंदे मातरम् के गायन के लिए प्रस्तावित नियम
विधेयक में राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर कुछ दिशा-निर्देश भी शामिल हैं। इनमें कहा गया है कि:
- सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् गाया जाना चाहिए।
- आधिकारिक कार्यक्रम शुरू होने से पहले इसका गायन किया जाना चाहिए।
- इसके सभी छह अंतरों को प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
- पूरा गीत लगभग 3 मिनट 10 सेकंड में पूरा होना चाहिए।
- गीत के दौरान लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना चाहिए।
- स्कूलों में सुबह की प्रार्थना से पहले वंदे मातरम् का गायन या प्रसारण किया जाना चाहिए।
वंदे मातरम् की रचना किसने की?
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत संस्कृत और बांग्ला भाषा के मिश्रण में लिखा गया है और इसके छह पद हैं। पहली बार इसे सार्वजनिक रूप से 1896 में कलकत्ता में गाया गया था। बाद में यह बंकिम चंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बना।
आजादी के आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख प्रतीक बन गया।
विधेयक पर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद
संसद में पेश होने से पहले ही इस विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रीय सम्मान को मजबूत करने वाला कदम बताया है, जबकि कांग्रेस ने सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि यह मोदी सरकार की “पहले जेल, फिर समाधान” वाली सोच को दर्शाता है।
मानसून सत्र आज से शुरू
संसद का मानसून सत्र सोमवार 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। विपक्ष पहले दिन से ही सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें कथित नीट पेपर लीक, सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने का मामला, ई-20 पेट्रोल विवाद और राम मंदिर चंदा चोरी के आरोप जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में संसद का यह सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है।
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