संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इससे पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विवाद तब बढ़ा जब सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने के विरोध में टीएमसी ने कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार किया था।
एनसीपीआई नेताओं ने टीएमसी के विरोध पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से मान्यता प्राप्त है। एनसीपीआई नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि उनकी पार्टी अब सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन चुकी है और सांसद काकोली घोष दस्तीदार लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करेंगी।
एनसीपीआई ने रविवार को अपनी पहली संसदीय दल की बैठक भी आयोजित की। इसमें काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक और सुदीप बंद्योपाध्याय को संसदीय दल का नेता घोषित किया गया। बंद्योपाध्याय ने कहा कि अब उनकी पार्टी संसद में एनडीए के निर्णयों के अनुसार काम करेगी।
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एनसीपीआई नेता काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों द्वारा सर्वदलीय बैठक के बहिष्कार को "अभूतपूर्व और अनुचित" बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र इस तरह से काम नहीं करता। सभी राजनीतिक दलों को देश के विकास के लिए अपने मतभेदों को अलग रखकर काम करना चाहिए।
वहीं, टीएमसी ने एनसीपीआई नेताओं की सदस्यता खत्म करने की मांग की है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एनसीपीआई नेताओं को "गद्दार" बताते हुए कहा कि यह पार्टी मान्यता प्राप्त नहीं है और इसका विलय अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी के अधीन है।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं अभी लंबित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इन सांसदों को बैठक में क्यों आमंत्रित किया।
किरण रिजिजू ने इस पर कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि वह सभी राजनीतिक दलों को बैठक में आमंत्रित करे और किसी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार समेत 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपनाया था और बाद में एनसीपीआई में शामिल हो गए। इसके बाद लोकसभा में टीएमसी की संख्या 28 से घटकर आठ रह गई है। लोकसभा अध्यक्ष ने मानसून सत्र के लिए एनसीपीआई के 20 सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है।
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