उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र की मजबूती और राष्ट्रीय हित के लिए समाज में बहस (debate) और मतभेद (dissent) आवश्यक हैं। यह विचार उन्होंने रामनाथ गोयनका उत्कृष्टता पत्रकारिता पुरस्कार 2026 के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्व और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचनात्मक सोच की भूमिका पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में विभिन्न दृष्टिकोणों और आलोचनात्मक विचारों का स्वागत होना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता केवल खबरें उजागर नहीं करती, बल्कि समाज में जागरूकता, सुधार और सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी है।
राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि बहस और मतभेद को केवल विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह राष्ट्रीय हित और लोकतांत्रिक सुधार के लिए जरूरी हैं। उन्होंने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि वे निष्पक्ष, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता को अपनाएं और समाज के लिए सतत योगदान दें।
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इस अवसर पर कई वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और मीडिया विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। समारोह में विभिन्न पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उपराष्ट्रपति ने पत्रकारिता में नैतिक मूल्यों और उच्च मानकों के पालन पर भी बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र की रीढ़ है और इसके माध्यम से पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है। उनके विचारों से उपस्थित लोग सहमत हुए और पत्रकारिता के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
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