पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” नीति के तहत चल रहे अभियान के बाद अब बड़ी संख्या में लोग भारत-बांग्लादेश सीमा की ओर लौटते देखे जा रहे हैं।
उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेकपोस्ट पर भारी भीड़ देखी गई। बताया जा रहा है कि इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो भारत में अवैध रूप से रह रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, सीमा पर पहुंचे कई लोगों ने दावा किया कि उनके पास अब कोई काम नहीं बचा है और प्रशासन उन्हें राज्य में रहने नहीं दे रहा है। हावड़ा में मोटरसाइकिल मैकेनिक का काम करने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक ने कहा, “यहां अब बहुत दिक्कत हो रही है, इसलिए हम वापस जा रहे हैं… काम नहीं है और कोई रहने नहीं दे रहा… हम दो-तीन साल पहले बांग्लादेश से आए थे… हमारे पास आधार या राशन कार्ड नहीं है… हम दस लोग आए थे, अब मैं अकेला वापस जा रहा हूं।”
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बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू ने दावा किया कि कई अवैध घुसपैठियों को पहले ही वापस भेजा जा चुका है और बाकी की तलाश जारी है। उन्होंने कहा, “घुसपैठियों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है। कुछ भाग गए हैं, कुछ वापस भेजे गए हैं और कुछ छिपे हुए हैं, उन्हें भी ढूंढा जाएगा।”
पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाएं। गृह एवं पहाड़ी मामलों के विभाग ने केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।
23 मई के आदेश में यह भी कहा गया है कि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या समुदाय के लोगों की पहचान कर उनके निर्वासन की प्रक्रिया तेज की जाए।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि अब ऐसे लोगों को लंबे समय तक हिरासत में रखने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा जा सकता है, जो उन्हें बांग्लादेश प्रशासन के हवाले करेगा।
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