पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टॉलीगंज विधानसभा क्षेत्र इस बार एक बेहद दिलचस्प और कड़े मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है। दो दशकों से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री अरूप बिस्वास का यह क्षेत्र मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार हालात पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहे हैं।
टॉलीगंज सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है, जिससे चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी इस बार पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
अरूप बिस्वास पिछले चार कार्यकाल से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। हालांकि इस बार मतदाता सूची (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया है।
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सूत्रों के अनुसार, विपक्षी उम्मीदवारों ने इस सीट पर कड़ी चुनौती पेश की है और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। ऐसे में यह मुकाबला अब केवल टीएमसी बनाम विपक्ष नहीं, बल्कि त्रिकोणीय संघर्ष में बदल चुका है।
स्थानीय स्तर पर विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं इस चुनाव के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। मतदाता इस बार बदलाव या निरंतरता के बीच निर्णय करने की स्थिति में हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि टॉलीगंज सीट का परिणाम इस बार काफी अप्रत्याशित हो सकता है, क्योंकि सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।
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