मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने के करीब है और ऐसे समय में राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2 फरवरी 2026 को मणिपुर में सरकार बहाली की दिशा में पहला औपचारिक कदम उठाया। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हुए लगभग एक वर्ष हो चुका है। राज्य में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के कारण केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लागू किया था। विभिन्न समुदायों के बीच टकराव, आगजनी, हत्याएं और बड़े पैमाने पर विस्थापन ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया था।
हिंसा की शुरुआत के बाद से ही राज्य सरकार पर स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहने के आरोप लगते रहे। कई इलाकों में प्रशासनिक ढांचा लगभग ठप हो गया था और केंद्र को बार-बार सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। हालात इतने बिगड़ गए कि राज्य सरकार के लिए शासन चलाना मुश्किल हो गया, जिसके बाद संविधान के तहत राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
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अब जबकि राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म होने वाली है, केंद्र और भाजपा के भीतर यह मंथन तेज हो गया है कि मणिपुर में एक स्थिर और प्रभावी सरकार कैसे गठित की जाए। तरुण चुग की नियुक्ति को इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। उनका काम विधायकों से बातचीत कर भाजपा विधायक दल का नेता चुनने की प्रक्रिया की निगरानी करना होगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकार का गठन ही पर्याप्त नहीं होगा। जब तक जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली, संवाद और शांति की प्रक्रिया तेज नहीं होती, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। ऐसे में आने वाले दिन मणिपुर की राजनीति और सुरक्षा स्थिति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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