कांग्रेस के संगठनात्मक फेरबदल में सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी एआईसीसी महासचिव नियुक्त किया गया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के इस फैसले को पायलट के धैर्य, स्वीकार्यता और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।
नियुक्ति के तुरंत बाद पंजाब कांग्रेस के विभिन्न गुटों के नेताओं ने पायलट का स्वागत किया। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग बराड़ और गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने उन्हें बधाई दी। रंधावा ने पायलट के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और लोगों से जुड़ाव को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण बताया।
पायलट के राजनीतिक सफर में धैर्य की अहम भूमिका रही है। सितंबर 2022 में उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अशोक गहलोत समर्थक विधायकों के विद्रोह के बाद नेतृत्व परिवर्तन की संभावना खत्म हो गई। इसके बावजूद पायलट ने कांग्रेस नहीं छोड़ी और संगठनात्मक कार्य जारी रखा।
और पढ़ें: कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, सचिन पायलट बने पंजाब प्रभारी; भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी
सचिन पायलट को अपने पिता राजेश पायलट की राजनीतिक विरासत भी मिली है। राजेश पायलट पूर्व वायुसेना स्क्वाड्रन लीडर और कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में शामिल थे। सचिन पायलट ने 26 वर्ष की उम्र में लोकसभा पहुंचकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई और 32 वर्ष की उम्र में केंद्रीय मंत्री बने। बाद में वे राजस्थान के उपमुख्यमंत्री भी रहे।
अब पंजाब में उनके सामने अलग-अलग नेताओं को साथ लाने, कार्यकर्ताओं का भरोसा बहाल करने और संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी। कांग्रेस के हालिया फेरबदल का व्यापक संदेश भी यही है कि पार्टी ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी देना चाहती है जो कठिन राज्यों में संगठन को जमीन पर मजबूत कर सकें।
और पढ़ें: कांग्रेस का राइजर दल से गठबंधन तोड़ना बदरुद्दीन अजमल के कंधे पर चढ़कर चुनावी फायदा लेने की साजिश: बीजेपी असम