कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की आईपीएल जीत के जश्न के दौरान एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ मामले में पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी. दयानंद समेत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए विभागीय जांच बंद कर दी है। सरकार ने अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त करते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी है।
यह दुखद घटना 4 जून 2025 को उस समय हुई थी, जब आरसीबी की पहली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) खिताबी जीत का जश्न मनाने के लिए हजारों क्रिकेट प्रशंसक स्टेडियम के बाहर एकत्र हुए थे। भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस हादसे के बाद भीड़ प्रबंधन और आयोजन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कई पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए निलंबित कर दिया था। इनमें तत्कालीन पुलिस आयुक्त बी. दयानंद, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकास कुमार विकास, तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (मध्य प्रभाग) शेखर, एक सहायक पुलिस आयुक्त और एक पुलिस निरीक्षक शामिल थे।
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मंगलवार को जारी सरकारी आदेश में कहा गया कि संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत जवाब और प्रशासनिक विभाग की राय की समीक्षा के बाद सक्षम प्राधिकारी ने विभागीय जांच बंद करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, निलंबित सहायक पुलिस आयुक्त और पुलिस निरीक्षक के संबंध में भी जल्द फैसला लिया जा सकता है।
इस मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट में आयोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) प्रबंधन पर डाली गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि आयोजन के लिए विधिवत अनुमति नहीं ली गई थी, पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद कार्यक्रम आयोजित किया गया, स्टेडियम के बाहर जरूरत से ज्यादा भीड़ जमा हो गई, अंतिम समय में प्रवेश पास की व्यवस्था बदलने से भ्रम की स्थिति बनी और भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।
हालांकि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विभागीय जांच से राहत मिल गई है, लेकिन हादसे के अन्य पहलुओं और विभिन्न पक्षों की जवाबदेही को लेकर जांच अभी भी जारी है।
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