भारतीय वायुसेना (आईएएफ) ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक सूक्ष्म लेकिन बेहद प्रभावशाली संदेश देकर उन आलोचकों को चुप करा दिया, जो यह दावा करते रहे हैं कि भारत ने 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक और पिछले वर्ष हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन हथियारों के इस्तेमाल की बात कही थी, वे वास्तव में प्रयोग में नहीं लाए गए थे।
इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान वायुसेना ने कुछ अलग किया। दशकों से परेड में लड़ाकू विमानों की उड़ान आम बात रही है, लेकिन इस वर्ष आईएएफ ने पहली बार एक वीडियो जारी किया, जिसमें लड़ाकू विमानों को उन्हीं हथियारों से लैस दिखाया गया, जिनका उपयोग बालाकोट स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। यह संदेश भले ही शांत था, लेकिन उसकी गूंज बहुत दूर तक सुनाई दी।
वीडियो में कई ऐतिहासिक दृश्य शामिल थे। पहली बार राफेल लड़ाकू विमान पर लगी मेटियोर लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल को स्पष्ट रूप से दिखाया गया। इसके अलावा एलसीए तेजस द्वारा मेटियोर मिसाइल दागे जाने का दृश्य भी सामने आया। पूरी तरह हथियारों से लैस मिराज-2000 विमान पर वही मिसाइलें देखी गईं, जिनका उपयोग 2019 की बालाकोट कार्रवाई में किया गया था।
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इस वीडियो ने पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए हथियारों और रणनीति संबंधी दुष्प्रचार को भी बेनकाब कर दिया। आलोचक लंबे समय से यह दावा करते रहे थे कि भारत के पास मेटियोर मिसाइल नहीं है, जबकि इसका अनुबंध पहले ही हो चुका है।
एक अन्य दुर्लभ दृश्य में स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल को सुखोई-30 एमकेआई पर ऑपरेशनल भूमिका में देखा गया, जो वायुसेना की ताकत में बड़ी बढ़ोतरी को दर्शाता है। यही नहीं, पुराने जगुआर विमानों पर भी अस्त्र मिसाइल दिखाई गई, जिससे स्पष्ट हुआ कि इन विमानों का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है।
वीडियो में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, हैमर स्टैंडऑफ बम, रैम्पेज एयर-टू-सर्फेस मिसाइल और मेटियोर जैसे अत्याधुनिक हथियार भी दिखाए गए। खास बात यह रही कि यह वीडियो स्वयं वायुसेना ने जारी किया, जो आमतौर पर अपने लाइव हथियार प्लेटफॉर्म सार्वजनिक नहीं करती। इससे यह साफ हो गया कि यह कदम अविश्वास करने वालों को सीधा और ठोस जवाब देने के लिए उठाया गया।
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