इंडिया गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को नई दिल्ली में संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग मुख्यालय निर्वाचन सदन तक मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यह मार्च मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में कथित बदलावों को लेकर विपक्ष के विरोध का हिस्सा है।
मार्च में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
मार्च से पहले संसद और निर्वाचन सदन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी तैनात किया गया। विजय चौक, आकाशवाणी भवन और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
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कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के प्रति जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचा है और उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्षी दलों ने फॉर्म 6 से जुड़े बदलावों और एसआईआर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। अदालत ने फॉर्म 6 से जुड़े रिकॉर्ड और उसमें कथित बदलावों के संबंध में चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। चुनाव आयोग ने हालांकि विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए एसआईआर से संबंधित फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के प्रदर्शन की आलोचना की है। भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है। इस बीच, इंडिया गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर अपने विरोध को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
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