समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण समुदाय को साधने की कोशिश करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के 'पीडीए' (PDA) फॉर्मूले में 'पंडित' भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्षी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ ब्राह्मण समाज और धार्मिक नेताओं को भी निशाना बना रही है।
लखनऊ स्थित सपा प्रदेश मुख्यालय में समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि लोग पीडीए की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "जब से भाजपा पीडीए से हारी है, तब से वह इसकी नई-नई परिभाषाएं गढ़ रही है। लेकिन वे भूल गए हैं कि पीडीए का 'पीडी' पंडित भी है। जितनी ज्यादा पीड़ा देंगे, पीडीए उतना ही मजबूत होगा।"
गौरतलब है कि 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने पीडीए का नारा दिया था, जिसका अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताया गया था। अब उन्होंने इसमें पंडित समुदाय को भी जोड़ने की बात कही है।
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अखिलेश यादव ने दावा किया कि राज्य सरकार ने पहले गोमती नगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में सम्मेलन की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण कार्यक्रम पार्टी कार्यालय में आयोजित करना पड़ा। उन्होंने जनेश्वर मिश्र को "छोटे लोहिया" बताते हुए कहा कि उनका योगदान समाजवादी आंदोलन के लिए प्रेरणास्रोत है।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर विपक्षी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि अब ब्राह्मण समाज को भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज महाकुंभ के दौरान पवित्र स्नान से रोका गया और उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
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