भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की 31 मार्च 2024 तक की अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में ओडिशा सरकार के विभिन्न विभागों में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में सरकारी धन, जमीन, खनन, सड़क, शिक्षा, सिंचाई और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों की जांच की गई।
बरगढ़ और ढेंकानाल की छह ग्राम पंचायतों में करीब 43.30 लाख रुपये की लागत से बनाए गए नौ सोलर वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट बंद मिले। इससे लगभग 28,820 लोगों को पेयजल सुविधा नहीं मिल सकी। वहीं 25 सरकारी परिसंपत्तियों पर अनधिकृत कब्जे का मामला सामने आया। इन संपत्तियों के निर्माण पर करीब 2.59 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
ऑडिट में 14 ऐसे कार्यों का भी उल्लेख है, जिनकी कुल लागत 3.30 करोड़ रुपये थी और उन्हें कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया के बिना कराया गया। निमापाड़ा पंचायत समिति में 2017 से 2020 के बीच 77.80 लाख रुपये की अप्रदत्त पेंशन राशि अधिकारियों के पास अनधिकृत रूप से रखे जाने की बात कही गई है।
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भूमि से जुड़े मामलों में 668.893 एकड़ सरकारी जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 597.87 करोड़ रुपये थी, पर अनधिकृत कब्जे की बात सामने आई। इसके अलावा 568.876 एकड़ वन भूमि का गैर-वन गतिविधियों के लिए इस्तेमाल और वन्यजीव क्षेत्र की 13.65 एकड़ जमीन को 156 प्लॉट में बांटने का मामला भी रिपोर्ट में दर्ज है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 127 कार्यों में 40.55 करोड़ रुपये की लिक्विडेटेड डैमेज राशि वसूल नहीं की गई। 30 परियोजनाओं के नियमित रखरखाव की कमी से 23.02 करोड़ रुपये का बचने योग्य खर्च सामने आया।
शिक्षा विभाग में ई-कंटेंट की दोहरी खरीद से 430 स्कूलों के लिए 7.39 करोड़ रुपये के खर्च का उल्लेख है। 54 स्कूलों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशाला और इंटरनेट जैसी सुविधाएं भी खराब स्थिति में मिलीं।
मोटर वाहन मामलों में विभिन्न उल्लंघनों के लिए करीब 640.87 करोड़ रुपये के संभावित जुर्माने की वसूली नहीं होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
खनन क्षेत्र में भी गंभीर मामले सामने आए। एक मामले में दो खदानों से 1.17 करोड़ टन से अधिक कोयला उत्पादन से संबंधित 975.57 करोड़ रुपये की देनदारी का उल्लेख है। जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के तहत भी नियमों से अलग परियोजनाओं और मंजूरियों पर सवाल उठाए गए हैं।
सीएजी रिपोर्ट में सरकारी विमान और हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल, संरक्षित क्षेत्रों में निर्माण तथा सिंचाई परियोजनाओं में मंजूरी और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी खामियों का भी उल्लेख किया गया है।
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