फ्लाइट कैडेट मीनाक्षी कुमारी की कहानी भारत में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण और रक्षा सेवाओं में उनके बढ़ते योगदान का प्रेरणादायक उदाहरण है। हरियाणा के चरखी दादरी से शुरू हुआ उनका सफर आज भारतीय वायुसेना की अधिकारी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
एक सैन्य परिवार में पली-बढ़ीं मीनाक्षी कुमारी के पिता भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल, धौला कुआँ में हुई। वर्ष 2021 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के द्वार पहली बार महिला अभ्यर्थियों के लिए खोले गए। इस अवसर को मीनाक्षी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनाया। उन्होंने एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण की, सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) की कठिन प्रक्रिया को पार किया और लंबी प्रतीक्षा के बाद उन्हें प्रवेश पत्र प्राप्त हुआ।
6 अगस्त 2022 को मीनाक्षी कुमारी ने एनडीए में प्रवेश लेकर इतिहास रच दिया। अगले तीन वर्षों में उन्होंने कठोर सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्टता के उच्च मानकों को अपनाया। कठिन परेड, दंडात्मक दौड़ और शारीरिक चुनौतियों के बीच उन्होंने धैर्य, आत्मविश्वास और टीम भावना का महत्व सीखा।
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30 मई 2025 को उन्होंने खेत्रपाल परेड ग्राउंड में प्रतिष्ठित ‘अंतिम पग’ पार किया और आधिकारिक रूप से ‘एक्स-एनडीए’ का सम्मान प्राप्त किया। वर्तमान में वे एयर फोर्स अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं, जहां हर उड़ान उनके लिए नया अनुभव और सीख लेकर आती है।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार और सशस्त्र बलों ने 2021 में महिलाओं को एनडीए में प्रवेश देने का निर्णय लिया था। इस फैसले ने रक्षा क्षेत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक नया अध्याय लिखा। मीनाक्षी कुमारी की सफलता इसी परिवर्तन की जीवंत मिसाल है।
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