गोवा में नाइटक्लब में लगी भीषण आग की घटना को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मजिस्ट्रियल जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अर्पोरा-नागोआ गांव के सरपंच रोशन रेडकर को अयोग्य घोषित कर दिया गया है, जबकि स्थानीय पंचायत के तत्कालीन सचिव रघुवीर बागकर को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई बुधवार (31 दिसंबर 2025) को की गई।
पंचायत निदेशक महादेव अरौंदेकर ने दो अलग-अलग आदेश जारी करते हुए सरपंच रोशन रेडकर को पद से हटाने और पंचायत सचिव रघुवीर बागकर को सेवा से निकालने का फैसला लिया। जांच रिपोर्ट में रेडकर के आचरण को “कर्तव्यों के पालन में लगातार लापरवाही” बताया गया है। आदेश में कहा गया है कि सार्वजनिक विश्वास के उल्लंघन के कारण यह भीषण त्रासदी हुई, जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई। यह आदेश गोवा पंचायती राज अधिनियम की धारा 50(5) के तहत पारित किया गया।
आदेश के अनुसार, रोशन रेडकर को पंचायत की सदस्यता से हटाया गया है और उन्हें अगले पांच वर्षों तक किसी भी पंचायत पद पर रहने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं, पंचायत सचिव रघुवीर बागकर को लेकर जारी आदेश में कहा गया है कि विवादित नाइटक्लब को ध्वस्त करने के आदेश के खिलाफ जब निदेशालय में अपील हुई, तब वह सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे। उनकी अनुपस्थिति के कारण ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लग गई।
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इससे पहले रघुवीर बागकर को निलंबित किया गया था। उनके साथ गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तत्कालीन सदस्य सचिव शर्मिला मोंटेइरो और तत्कालीन पंचायत निदेशक सिद्धि हलारनकर को भी निलंबित किया गया था।
मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के अनुसार, ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नामक नाइटक्लब, जहां दिसंबर के पहले सप्ताह में आग लगने से 25 लोगों की मौत हुई, एक नमक के खेत के बीच स्थित था और बिना वैध व्यापार लाइसेंस के संचालित हो रहा था। इस मामले में पहले ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो अधिकारियों को भी निलंबित किया जा चुका है।
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