उत्तराखंड के पवित्र धार्मिक नगर हरिद्वार में एक अनोखी मांग सामने आई है। अखंड परशुराम अखाड़ा से जुड़े संतों ने शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से एक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत संतों ने खाद्य स्टॉलों, रेहड़ी-पटरी संचालकों और दुकानदारों से अपने साइनबोर्ड तथा मेन्यू से ‘बिरयानी’ शब्द हटाने की अपील की है।
संतों का कहना है कि हरिद्वार हिंदू आस्था का एक प्रमुख केंद्र है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं। ऐसे में शहर की धार्मिक पहचान और आध्यात्मिक वातावरण को बनाए रखना आवश्यक है। उनका मानना है कि कुछ खाद्य पदार्थों के नाम और उनसे जुड़ी धारणाएं इस पवित्र वातावरण के अनुरूप नहीं हैं।
अखंड परशुराम अखाड़ा के संतों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय या खाद्य परंपरा का विरोध करना नहीं है, बल्कि हरिद्वार की विशिष्ट धार्मिक पहचान को संरक्षित करना है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और व्यापारियों से सहयोग की अपेक्षा जताई है।
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इस अभियान को लेकर शहर में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग संतों की पहल का समर्थन कर रहे हैं और इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि भोजन और उसके नाम को लेकर ऐसे प्रतिबंध उचित नहीं है।
फिलहाल यह अभियान चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय स्तर पर इस पर बहस जारी है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संतों की इस मांग पर व्यापारियों और प्रशासन का क्या रुख रहता है।
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