छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कोंडापल्ली बैली ब्रिज बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम जंगल क्षेत्रों को जोड़ने में नई उम्मीद के रूप में सामने आया है। यह पुल क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
यह बैली ब्रिज सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित किया गया है और इसे आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। पारंपरिक पुलों की तुलना में यह निर्माण लागत में लगभग एक-चौथाई से एक-पांचवें हिस्से में तैयार किया जा सकता है और इसे मात्र एक महीने के भीतर पूरा किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं न केवल दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में भी सुधार होगा।
और पढ़ें: पश्चिम बंगाल: पत्नी ने पति को पीठ पर उठाकर सुशांत अधिकारी की जनसुनवाई में पहुंची
कोंडापल्ली बैली ब्रिज के बनने से अब ग्रामीण और वन क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। इससे न केवल दूरी कम होगी बल्कि आपातकालीन सेवाओं की पहुंच भी तेज हो सकेगी।
अधिकारियों के अनुसार, यह पुल रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की आवाजाही को आसान बनाता है। साथ ही यह क्षेत्रीय विकास योजनाओं को गति देने में भी मदद करेगा।
कुल मिलाकर, कोंडापल्ली बैली ब्रिज बस्तर क्षेत्र के लिए विकास और संपर्क का नया द्वार खोल रहा है, जिससे आने वाले समय में इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
और पढ़ें: हिमाचल प्रदेश में 3 जून से बारिश की संभावना, मानसून कमजोर रहने के संकेत: IMD