उत्तर-पश्चिम लंदन के एक प्रतिष्ठित प्राइमरी स्कूल पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगा है। प्रवासी समुदाय की वकालत करने वाले संगठन INSIGHT UK ने दावा किया है कि एक आठ वर्षीय छात्र को माथे पर तिलक लगाने को लेकर स्कूल में सवालों और आपत्तियों का सामना करना पड़ा, जिससे बच्चे और उसके परिवार को गहरा मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
INSIGHT UK ने सोमवार (19 जनवरी 2026) को जारी बयान में कहा कि यह घटना वेम्बली स्थित विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल में हुई। संगठन के अनुसार, इस पूरे प्रकरण के बाद हिंदू माता-पिता के पास अपने बच्चों को स्कूल से हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा और कम से कम चार छात्रों को स्कूल छोड़ना पड़ा।
हालांकि, स्कूल प्रशासन ने धार्मिक भेदभाव के सभी आरोपों से इनकार किया है। स्कूल का कहना है कि वह एक “विविध और समावेशी” संस्था है, जहां 50 से अधिक भाषाई पृष्ठभूमियों से आए छात्र पढ़ते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में हिंदू विद्यार्थी भी शामिल हैं।
और पढ़ें: बांग्लादेश में कुछ ही घंटों के भीतर दो हिंदू पुरुषों की हत्या, कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
INSIGHT UK ने कहा, “तिलक-चंदलो कोई सजावटी या सांस्कृतिक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह कई हिंदुओं के लिए एक अनिवार्य धार्मिक आस्था का हिस्सा है। किसी बच्चे को अपने धर्म का पालन करने से रोकना या इसके लिए उसे शर्मिंदा करना आधुनिक और बहुसांस्कृतिक ब्रिटेन में पूरी तरह अस्वीकार्य है।”
संगठन ने आरोप लगाया कि स्कूल के प्रधानाचार्य और गवर्निंग बॉडी ने बातचीत के दौरान सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता का अभाव दिखाया। INSIGHT UK ने इसे शक्ति असंतुलन वाला संवाद बताते हुए कहा कि हिंदू धार्मिक परंपराओं को कमतर आंका गया।
वहीं, स्कूल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उनकी नीति के तहत छात्रों को किसी भी प्रकार के दिखाई देने वाले त्वचा-चिह्न, जिनमें धार्मिक चिह्न भी शामिल हैं, पहनने से मना किया गया है। हालांकि, स्कूल ने परिवार की धार्मिक भावनाओं को मान्यता देते हुए तिलक को शरीर के किसी कम दिखाई देने वाले हिस्से पर लगाने का सुझाव दिया था, जिसे माता-पिता ने स्वीकार नहीं किया।
स्कूल ने यह भी कहा कि OFSTED निरीक्षणों में उसके समावेशी वातावरण की सराहना की गई है और उसकी प्राथमिकता हमेशा सभी छात्रों का कल्याण रही है।
और पढ़ें: हमारा किसी से कोई विवाद नहीं: बांग्लादेश में हमले के शिकार हिंदू व्यक्ति की पत्नी का दर्द