नेपाल और चीन की सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 939 हो गई है। नेपाल की आपदा प्राधिकरण ने बताया कि करीब 3,925 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान छठे दिन भी जारी रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में भी 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। इस तरह पूरे क्षेत्र में मृतकों की संख्या कम से कम 955 और लापता लोगों की संख्या 4,471 हो गई है।
नेपाल की लापता लोगों की सूची में 592 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लापता कर्मचारियों की संख्या घटकर 639 रह गई है। नेपाल के 3,333 नागरिक अभी भी लापता हैं। इनमें नुवाकोट जिले से 1,158 और पड़ोसी रसुवा जिले से 865 लोग शामिल हैं। लापता लोगों में 45 नेपाली सेना के जवान, 38 पुलिसकर्मी और 18 सीमा शुल्क एवं आव्रजन अधिकारी भी हैं।
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भारत के उत्तर प्रदेश में अधिकारियों ने नेपाल से आने वाली नदियों से 17 शव बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि ये बाढ़ पीड़ितों के शव हैं। पहचान की प्रक्रिया जारी है और इन शवों को नेपाल के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है।
पीएम बालेन्द्र शाह ने जलवायु परिवर्तन को लेकर चेताया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि रसुवा में भोटेकोशी नदी की बाढ़ सामान्य आपदा नहीं थी। उन्होंने बताया कि चीन-नेपाल सीमा के पास हिमनद के ढहने से पानी, बर्फ और मलबे का भारी सैलाब आया।
शाह ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के साथ ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ज्यादा प्रभावी कदम उठाने और हिमालयी क्षेत्र के जोखिमों पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की।
वैज्ञानिकों के अनुसार, बढ़ते वैश्विक तापमान से हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे हिमालय समेत दुनिया के कई हिस्सों में अचानक बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।
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