लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बहस और संवाद के स्तर में हो रही गिरावट पर चिंता जताई है। भुवनेश्वर में आयोजित अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) कल्याण बैठक में बोलते हुए बिरला ने कहा कि देश को ऐसा राष्ट्र बनाना होगा जो समानता पर आधारित हो और जहां दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों के अधिकारों की पूरी गारंटी हो।
उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में बहस का स्तर गिरना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए शुभ संकेत नहीं है। विधायकों और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे संवेदनशील मुद्दों पर तथ्यों और तर्कों के साथ चर्चा करें, ताकि समाज के कमजोर वर्गों की वास्तविक समस्याओं का समाधान निकल सके।
बिरला ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन कानूनों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासियों और अन्य वंचित समूहों के अधिकारों की रक्षा करना केवल संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व भी है।
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कार्यक्रम में वक्ताओं ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों की उपलब्धता पर भी चर्चा की। बिरला ने कहा कि संसद को ऐसे मंच के रूप में कार्य करना चाहिए जहां रचनात्मक बहस से नीति निर्माण को दिशा मिले और कोई भी वर्ग विकास की मुख्यधारा से बाहर न रह जाए।
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