भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महंगाई पर काबू पाने के प्रयासों के बीच प्रमुख नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। तीन साल से अधिक समय बाद हुई इस पहली बढ़ोतरी का सीधा असर होम लोन, वाहन ऋण और कॉरपोरेट कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। मौजूदा कर्जदारों की ईएमआई भी बढ़ने की संभावना है।
इससे पहले आरबीआई ने फरवरी 2023 में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 6.50 प्रतिशत किया था। इसके बाद 2023-24 के दौरान दर में बदलाव नहीं किया गया। वर्ष 2025 में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कटौती का चक्र शुरू किया था।
50 लाख के होम लोन पर कितना बढ़ेगा खर्च?
एक सामान्य 50 लाख रुपये के होम लोन, जिसकी अवधि 30 वर्ष है, पर 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का असर स्पष्ट दिखाई देता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में यदि मौजूदा ब्याज दर 7.25 प्रतिशत है, तो ईएमआई 34,109 रुपये से बढ़कर 34,961 रुपये हो जाएगी। यानी हर महीने 852 रुपये अधिक चुकाने होंगे।
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वहीं, निजी बैंक में 7.75 प्रतिशत की मौजूदा दर पर 35,821 रुपये की ईएमआई बढ़कर 36,688 रुपये हो जाएगी। यानी मासिक किस्त में 867 रुपये की बढ़ोतरी होगी।
बेसिक होम लोन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक अतुल मोंगा के अनुसार, यदि पूरा ऋण 30 वर्ष तक चलता है तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के मामले में अतिरिक्त ब्याज भुगतान करीब 3.07 लाख रुपये, जबकि निजी बैंक के मामले में करीब 3.12 लाख रुपये हो सकता है।
मोंगा का कहना है कि रेपो दर में सीमित बढ़ोतरी से उधारी लागत पर मामूली असर पड़ेगा, लेकिन इससे घर खरीदने की दीर्घकालिक मांग में बड़ा बदलाव जरूरी नहीं है। शहरीकरण, बढ़ती आय और छोटे शहरों में पहली बार घर खरीदने वालों की आकांक्षाएं मांग को समर्थन दे सकती हैं।
हालांकि, संजीविनी ग्रुप के प्रबंध निदेशक सुरेश एचए का मानना है कि आगे भी दरें बढ़ने का संकेत मिलने पर आवास की मांग और घर खरीदने की क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है। उनके अनुसार, त्योहारी मांग को बनाए रखने के लिए बैंक मौजूदा ब्याज दरों को स्थिर भी रख सकते हैं।
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