इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की लगातार कोशिशों के बावजूद दो साल से अधिक समय से लापता 42 वर्षीय सुदामा देवी को तलाशने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सीबीआई से सुदामा देवी का पता लगाकर उन्हें अदालत के सामने पेश करने के लिए सभी जरूरी प्रयास करने को कहा है।
न्यायमूर्ति संदीप जैन ने सुदामा देवी के पति की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने बताया कि सुदामा देवी 8 सितंबर 2024 से लापता हैं। उनके लापता होने की रिपोर्ट 9 सितंबर 2024 को महराजगंज जिले के पुरंदरपुर थाने में दर्ज कराई गई थी।
अदालत ने कहा कि दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद पुलिस सुदामा देवी का पता लगाने में सफल नहीं हुई है। मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सुदामा देवी को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने का आरोप भी लगाया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से महिला के बारे में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
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राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि सुदामा देवी को तलाशने के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई थी। अदालत में जिस व्यक्ति को पेश किए जाने की मांग की जाती है, उसे कानूनी भाषा में ‘कॉर्पस’ कहा जाता है।
राज्य ने बताया कि सुदामा देवी 42 वर्षीय महिला हैं और उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उनके पास मोबाइल फोन भी नहीं था। पुलिस के अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण उनका पता लगाना मुश्किल हुआ।
29 सितंबर को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि पुलिस के सभी प्रयासों के बावजूद सुदामा देवी अब तक नहीं मिली हैं। इसके बाद अदालत ने उसी दिन अपने आदेश में मामले की जांच और महिला को तलाशने के लिए सीबीआई को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उसके अधिकारियों को सीबीआई को जांच में हर जरूरी सहयोग और सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने सीबीआई को सुदामा देवी का पता लगाकर उन्हें 1 दिसंबर 2026 को अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई भी 1 दिसंबर 2026 को होगी।
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