रूस सरकार ने डीजल और पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध को बढ़ाकर 31 जनवरी 2027 तक कर दिया है। रूसी सरकार ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में ईंधन निर्यात की अनुमति जारी रहेगी।
सरकार के बयान के अनुसार, अंतर-सरकारी समझौतों के तहत होने वाले ईंधन निर्यात और मानवीय सहायता के रूप में भेजे जाने वाले ईंधन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। रूस ने घरेलू ईंधन बाजार को स्थिर बनाए रखने और देश के भीतर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
रूस ने शुरुआत में डीजल निर्यात पर यह प्रतिबंध 8 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक के लिए लगाया था। यह फैसला यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए गए लगातार ड्रोन हमलों के बाद लिया गया था। इन हमलों के कारण कई क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई और कीमतों में तेजी देखने को मिली।
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रूसी अधिकारियों के अनुसार, तेल रिफाइनरियों पर हमलों के कारण घरेलू बाजार में ईंधन आपूर्ति को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसलिए सरकार ने निर्यात सीमित कर देश के अंदर ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर नियंत्रण रखने की रणनीति अपनाई।
रूस दुनिया के प्रमुख तेल और ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में उसके ईंधन निर्यात संबंधी फैसलों का अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक समझौतों और मानवीय जरूरतों के लिए ईंधन की आपूर्ति जारी रहेगी।
यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष के दौरान दोनों देशों की ऊर्जा सुविधाएं लगातार निशाने पर रही हैं। यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की कुछ प्रमुख तेल प्रसंस्करण इकाइयों को प्रभावित किया है, जिसके बाद मॉस्को ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्यात प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
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