अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक व्यापारी जहाज पर ईरानी हमले के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर सोमवार तड़के कई चरणों में सैन्य हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की।
अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान पर किए गए हमलों का उद्देश्य उसकी उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक नाविकों और व्यावसायिक जहाजों को निशाना बना सकता है। अमेरिका की यह कार्रवाई उस घटना के बाद हुई, जिसमें ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज पर हमला किया था। इस हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी और चालक दल का एक सदस्य लापता हो गया था।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का केंद्र अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य बन गया है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अमेरिका और ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खुला है। वहीं, ईरान का कहना है कि जब तक क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाल नहीं होती, तब तक समुद्री यातायात को सामान्य रूप से संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
ईरान के हमलों के बाद अमेरिकी सहयोगी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने की आशंका जताई जा रही है।
यह घटनाक्रम उस संघर्ष के बाद सामने आया है, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद और गंभीर हो गया था। ताजा हमलों ने पहले से कमजोर कूटनीतिक प्रयासों को भी झटका दिया है और पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ा दी है।
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