वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार में आज गिरावट दर्ज की गई। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता में ठहराव के चलते निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखा।
बीएसई सेंसेक्स 982.71 अंकों या 1.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,681.29 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 275.10 अंक या 1.14 प्रतिशत गिरकर 23,897.95 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में यह गिरावट व्यापक रही और लगभग सभी सेक्टर दबाव में नजर आए।
विशेष रूप से आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट आई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 5 प्रतिशत तक टूट गया। इस गिरावट ने बाजार के समग्र प्रदर्शन पर बड़ा असर डाला।
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मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.96 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.87 प्रतिशत नीचे बंद हुए। फार्मा और मीडिया सेक्टर भी लाल निशान में रहे, जिससे बाजार की कमजोरी और बढ़ गई।
हालांकि, निफ्टी मेटल इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें गिरावट सीमित रही। यह सेक्टर अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक स्थिर दिखाई दिया।
बाजार में गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अप्रैल वायदा अनुबंध 2.07 प्रतिशत बढ़कर 107.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी अवरोध के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल आया है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
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