उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की यह घटना केवल एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे परिवार की दर्दनाक दास्तान है जो हमेशा के लिए टूट गया है। इस त्रासदी की सबसे बड़ी कीमत एक 6 साल का मासूम बच्चा चुका रहा है, जिसकी जुबान पर बार-बार सिर्फ एक ही सवाल है—“मेरे पापा कब आएंगे?”
फीलखाना थाना क्षेत्र में हुए मनीष गुप्ता हत्याकांड ने पूरे कानपुर शहर को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ओर मनीष गुप्ता के पिता हैं, जिनकी आंखों में आंसू हैं और जो अपने बेटे की अंतिम यात्रा में खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनका 6 साल का पोता रियांश है, जिसे अब तक यह समझ नहीं आया है कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे।
छोटा रियांश बार-बार अपने परिवार से एक ही सवाल पूछ रहा है—“पापा कहां हैं और कब आएंगे?” उसकी मासूमियत इस दर्दनाक सच्चाई से अनजान है कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। घर का माहौल पूरी तरह गमगीन है और हर कोना मातम में डूबा हुआ है।
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घटना के बाद से घर में रिश्तेदारों और पड़ोसियों का आना-जाना लगा हुआ है, लेकिन सबसे अधिक दिल तोड़ देने वाला दृश्य तब सामने आता है जब रियांश अपने दादा का हाथ पकड़कर घर में घूमता है और हर आने-जाने वाले से अपने पिता और मां के बारे में पूछता है।
यह घटना पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का कारण बनी हुई है। स्थानीय लोग इसे एक जघन्य अपराध बताते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही रह गया है कि एक मासूम की जिंदगी में आए इस खालीपन को कौन भर पाएगा।
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