बांग्लादेश की एक अदालत ने शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को 16 लोगों को कड़े आतंकवाद निरोधक कानून (Anti-Terrorism Act) के तहत जेल भेज दिया। इनमें कई 1971 के मुक्ति संग्राम के दिग्गज, एक विश्वविद्यालय प्रोफेसर और एक पत्रकार शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मंत्री और 1971 युद्ध के दिग्गज अब्दुल लतीफ़ सिद्दीकी, ढाका विश्वविद्यालय के विधि प्रोफेसर हाफिजुर रहमान कुरज़न और पत्रकार मंज़ुरुल आलम पन्ना भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें जेल भेजा गया है। अदालत का यह निर्णय उस घटना के एक दिन बाद आया जब राजधानी ढाका में उनकी निर्धारित सार्वजनिक चर्चा को कथित रूप से एक भीड़ ने बाधित कर दिया था।
अधिकारियों का कहना है कि इन सभी व्यक्तियों पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। मामले की सुनवाई अगले सप्ताह फिर से होने की संभावना है।
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विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की आलोचना की है और कहा कि यह राजनीतिक उत्पीड़न का उदाहरण हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि गिरफ्तार लोगों को तुरंत रिहा किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
इन गिरफ्तारियों ने देश में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती खींचतान के चलते इस तरह की कार्रवाई बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर सकती है।
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