दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 17 छात्रों को देर रात अदालत ने जमानत दे दी। पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अनीमेष कुमार ने रात 9 बजे से 9:25 बजे के बीच चार अलग-अलग आदेश जारी कर छात्रों को जमानत दी।
अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन आरोपी छात्र आदतन अपराधी नहीं हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि सभी आरोपी बहुत कम उम्र के हैं और उनके खिलाफ पहले से अपराध करने की प्रवृत्ति दिखाई नहीं देती। चूंकि वे छात्र हैं, इसलिए न्यायिक हिरासत में रखने से उनकी पढ़ाई और करियर की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
अदालत ने प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि के एक जमानती के आधार पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने, धमकाने या प्रलोभन देने और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने को कहा गया है।
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जमानत के दौरान छात्रों को किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होने, अपना स्थायी और वर्तमान पता तथा सक्रिय मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने और नंबर चालू रखने का निर्देश दिया गया है। उन्हें हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होना होगा और बिना पूर्व अनुमति देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। शर्तों का उल्लंघन होने पर जांच एजेंसी जमानत रद्द करने की मांग कर सकती है।
यह मामला संसद मार्ग थाना पुलिस ने दर्ज किया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि छात्र गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा थे, उन्होंने सार्वजनिक रास्ते को बाधित किया, पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। जांच अधिकारी ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत की मांग करते हुए कहा था कि आरोपी आगे अपराध कर सकते हैं या जांच प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, अदालत ने दो आरोपियों द्वारा हिरासत में कथित प्रताड़ना के लगाए गए आरोपों पर डीसीपी से रिपोर्ट भी मांगी है।
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