मध्य प्रदेश के व्यवसायी मनोज परमार और उनकी पत्नी नेहा की आत्महत्या के एक साल से अधिक समय बाद, एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने उनके कथित रूप से हुई वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में चार्जशीट दायर की है। जांच में पाया गया कि परमार ने दो सरकारी योजनाओं के तहत 6 करोड़ रुपये से अधिक के धोखाधड़ी वाले ऋण लिए थे।
ED के भोपाल जोनल ऑफिस ने 28 जनवरी, 2026 को पूर्व पंजाब नेशनल बैंक सीहोर शाखा के ब्रांच मैनेजर मार्क पायस करारी और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दायर की। अदालत ने आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
जांच के अनुसार, मनोज परमार ने बैंक अधिकारियों की मदद से एक परतदार धोखाधड़ी योजना को अंजाम दिया। ED के अनुसार, परमार ने 2016 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (CMYUY) के तहत 18 फर्जी ऋण हासिल किए। इन 6.2 करोड़ रुपये में से 6.01 करोड़ रुपये “फर्जी आवेदक, नकली दस्तावेज और तैयार किए गए कोटेशन” के जरिए बांटे गए।
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इस मामले में ED ने आरोप लगाया कि यह योजना केवल व्यक्तियों को आर्थिक लाभ देने की बजाय धोखाधड़ी के माध्यम से भारी राशि हड़पने के लिए इस्तेमाल की गई। इस जटिल धोखाधड़ी ने परमार को कथित तौर पर कानूनी और वित्तीय दबाव में डाल दिया, जिसके बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली।
ED अब मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है। यह मामला मध्य प्रदेश और पूरे देश में बैंकिंग और सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करता है।
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