मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली है। तेहरान ने इन हमलों को क़ेश्म द्वीप पर हालिया अमेरिकी हमलों का जवाब बताया है।
आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि अब "हिट एंड रन" का दौर समाप्त हो चुका है और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा। संगठन ने दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए हैं।
हालांकि, अमेरिका और कुवैत दोनों ने कहा कि इन हमलों से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। कुवैती सेना के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी कहा कि कोई भी ईरानी मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ।
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तनाव के बीच कुवैत, बहरीन, इराक और एरबिल में कई विस्फोटों की खबरें सामने आईं। बहरीन में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।
इस संकट का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मार्ग में व्यवधान जारी रहा तो वैश्विक तेल आयात लागत में 20 अरब डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है।
बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 97 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
इस बीच, दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हमलों में चार वयस्कों और दो बच्चों की मौत की खबर है। जवाब में हिज्बुल्लाह के ड्रोन हमले में चार इज़राइली सैनिक घायल हो गए। ऐसे में पूरे क्षेत्र में युद्ध के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।
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