अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में आव्रजन एजेंटों के खिलाफ कई दिनों से चल रहे प्रदर्शनों के कारण हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को भी स्थिति गंभीर रही। इससे एक दिन पहले संघीय अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसी बीच, राज्य और स्थानीय नेताओं ने उस संघीय कार्रवाई के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसके दौरान मिनियापोलिस की एक महिला की गोली लगने से मौत हो गई थी।
सोमवार को पूरे दिन और कई शहरों में संघीय एजेंटों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होते रहे। मिनियापोलिस में जब आव्रजन अधिकारी एक व्यक्ति से पूछताछ कर रहे थे, तब वहां जमा भीड़ पर एजेंटों ने आंसू गैस छोड़ी। वहीं उत्तर-पश्चिम में सेंट क्लाउड शहर में, सोमाली समुदाय द्वारा संचालित दुकानों के बाहर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया, जब ICE अधिकारी वहां पहुंचे।
रात होते-होते ट्विन सिटीज़ में संघीय इमारत के बाहर भी झड़पें हुईं, जिसे इस कार्रवाई का केंद्र बनाया गया था। इस बीच, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने मिनेसोटा में 2,000 से अधिक आव्रजन अधिकारियों की तैनाती का ऐलान किया है, जिसे ICE ने अब तक का सबसे बड़ा प्रवर्तन अभियान बताया है। इसके विरोध में मिनेसोटा राज्य ने मिनियापोलिस और सेंट पॉल शहरों के साथ मिलकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
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मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। राज्य के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने इसे “मिनेसोटा पर संघीय आक्रमण” करार दिया।
यह विरोध उस घटना के बाद और तेज हो गया, जब रैनी गुड नामक 37 वर्षीय महिला को एक ICE अधिकारी ने गोली मार दी थी। ट्रंप प्रशासन ने एजेंट का बचाव करते हुए कहा कि महिला और उसकी गाड़ी से खतरा था, लेकिन राज्य के नेताओं ने वीडियो फुटेज के आधार पर इस दावे को खारिज किया है।
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