दुबई में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन 2026 का भव्य उद्घाटन “शेपिंग फ्यूचर गवर्नमेंट्स” विषय के साथ हुआ, जिसमें दुनिया भर के नेता, नीति निर्माता और उद्योग जगत के दिग्गज एक मंच पर एकत्र हुए। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य यह समझना है कि नवाचार, सतत विकास और प्रौद्योगिकी किस तरह सार्वजनिक नीतियों और शासन प्रणालियों को नए सिरे से आकार दे रहे हैं।
सम्मेलन में सरकारों की नीतिगत क्षमता को मजबूत करने और आर्थिक, सामाजिक तथा तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श हो रहा है। कार्यक्रम के तहत 445 से अधिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें 450 से ज्यादा वैश्विक हस्तियां हिस्सा ले रही हैं। इनमें राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, नीति विशेषज्ञ और विचारक शामिल हैं, जो शासन के भविष्य, निवेश, सार्वजनिक वित्त और नेतृत्व जैसे अहम विषयों पर चर्चा कर रहे हैं।
सभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने भू-राजनीतिक तनावों और व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितताओं के बावजूद उम्मीद से बेहतर मजबूती दिखाई है। उन्होंने पिछले एक वर्ष में अमेरिका की व्यापार और विदेश नीति में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया अब “और अधिक विविध, बहुध्रुवीय और पहले से ज्यादा लचीली” हो गई है, हालांकि चुनौतियां भी अधिक जटिल हुई हैं।
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जॉर्जीवा ने बताया कि आईएमएफ ने आगामी वर्ष के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में सुधार किया है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं। उन्होंने इस सकारात्मक दृष्टिकोण का श्रेय निजी क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता, अपेक्षित व्यापार झटकों के सीमित प्रभाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से उत्पादकता बढ़ने को लेकर बढ़ते उत्साह को दिया।
शुल्कों में उतार-चढ़ाव और महंगाई के दबावों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में गिरावट नहीं आई, बल्कि उसने खुद को नए हालात के अनुसार ढाल लिया है। उनके अनुसार, शुरुआती दौर में ऊंचे शुल्क घोषित किए गए थे, लेकिन बातचीत के बाद उनमें उल्लेखनीय कमी आई और वास्तविक वसूली अनुमान से काफी कम रही।
यह शिखर सम्मेलन 5 फरवरी तक चलेगा, जिसमें 6,250 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 60 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, 500 से अधिक मंत्री, 150 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, 87 नोबेल पुरस्कार विजेता और 700 से अधिक वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं। सम्मेलन से भविष्य की शासन प्रणालियों को दिशा देने वाले नीतिगत विचारों और साझेदारियों के उभरने की उम्मीद है।
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