कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिका में अपनी उच्च शिक्षा की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी पढ़ाई बोस्टन विश्वविद्यालय से मिली छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण (एजुकेशन लोन) के माध्यम से पूरी हुई थी। उन्होंने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और यदि कोई जांच कराना चाहता है तो उसका स्वागत है।
एक साक्षात्कार में दीपके ने कहा, "मुझे बोस्टन विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति मिली थी। इसके अलावा मैंने शिक्षा ऋण भी लिया था, जिसे अभी चुकाना बाकी है। कोई भी इसकी जांच कराने के लिए स्वतंत्र है।"
यह बयान ऐसे समय आया है जब सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने दीपके के पिता, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं, की आर्थिक स्थिति और विदेश में पढ़ाई के खर्च की जांच की मांग की है।
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दीपके ने बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन की उस टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने सीजेपी के नेतृत्व में हुए परीक्षा अनियमितता विरोधी आंदोलन की तुलना वर्ष 2024 के बांग्लादेशी छात्र आंदोलन से की थी। दीपके ने इस तुलना को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि भारत का छात्र आंदोलन अलग प्रकृति का है और इसे बांग्लादेश या नेपाल के आंदोलनों से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लगातार महंगी और आम छात्रों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। दीपके ने यह भी कहा कि हालिया छात्र आंदोलनों के बाद सीजेपी की जिम्मेदारी बढ़ी है और संगठन जल्द ही अपने विस्तार की योजना पर काम करेगा।
सीजेपी प्रमुख ने महाराष्ट्र सरकार से कथित नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की मांग की। उन्होंने 15 वर्षीय प्रदर्शनकारी रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज मामले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनके बयानों पर कार्रवाई हो सकती है, तो राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों के बयानों पर भी समान मानदंड लागू होने चाहिए।
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